2013 से इस्राईल, सीरिया में इस तरह के हवाई हमले कर रहा है। उसके बाद से इस्राईली वायु सेना सीरिया में सैकड़ों हमले कर चुकी है। दमिश्क़ का कहना है कि विदेश समर्थित आतंकवादी गुटों के समर्थन में इस्राईल यह हमले कर रहा है। वहीं इस्राईल का दावा है कि ईरान, सीरया में अपनी सैन्य उपस्थिति मज़बूत करने के लिए सैन्य अड्डों की स्थापना कर रहा है।
हमलावर इस्राईली लड़ाकू विमानों के ख़िलाफ़ सीरिया के पुराने पड़ चुके एयर डिफ़ेस सिस्टम ने उस वक़्त बड़ी सफलता हासिल की थी, जब उसने इस्राईल के एक एफ़-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था।
सितम्बर 2018 में सीरियाई आसमान में एक दूसरी महत्वपूर्ण घटना घटी, जब सीरियाई एयर डिफ़ेंस सिस्टम ने रूस के एक सैन्य विमान को मार गिराया, जिसमें 15 सैन्य अधिकारी सवार थे।
सीरिया और रूस का कहना था कि इस्राईली एफ़-16 लड़ाकू विमानों ने सीरियाई एयर डिफ़ेस सिस्टम से बचने के लिए रूस के सैन्य विमान को शील्ड के तौर इस्तेमाल किया।
इसके फ़ौरन बाद, रूस ने सीरिया को एयर डिफ़ेंस सिस्टम एस-300 देने का एलान कर दिया, जिसका इस्राईल और अमरीका ने काफ़ी विरोध भी किया। लेकिन रूस ने कुछ हफ़्तों के दौरान ही एस-300 सीरिया पहुंचा दिया।
रूस के इस क़दम को क्षेत्र में गेम चेंजर के रूप में देखा गया, क्योंकि सैन्य विशेषज्ञों का मानना था कि इसके बाद, इस्राईली लड़ाकू विमान मनमाने ढंग से सीरियाई ठिकानों पर बमबारी नहीं कर सकेंगे।
लेकिन ज़मीन पर बहुत कुछ नहीं बदला और इस्राईली लड़ाकू विमानों ने सीरियाई सैन्य ठिकानों पर बमबारी जारी रखी, क्योंकि एस-300 के मिसाइलों ने इन विमानों का पीछा नहीं किया।
यहां यह सवाल उठता है कि इस्राईल की वायु सेना द्वारा लगातार सीरियाई वायु सीमा का उल्लंख करने और सीरियाई संप्रभुता की धज्जियां उड़ाने के बावजूद, एस-300 क्यों ख़ामोश है?
इस सवाल के जवाब में कहा जा सकता है कि यह सही है कि रूस ने सीरिया में एस-300 की तैनाती कर दी है, लेकिन उसका फ़ुल कंट्रोल रूसी ऑप्रेटर्स और सैन्य सलाहकारों के पास रखा है। यानी बटन दबाने का अधिकार रूसी सेना के पास ही है। या मास्को, दमिश्क़ को इस्राईली लड़ाकू विमानों के ख़िलाफ़ एस-300 के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं दे रहा है।
अगर ऐसा है तो साफ़ ज़ाहिर है कि रूस सीरिया में डबल गेम खेल रहा है। आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में मास्को, दमिश्क़ की भरपूर मदद करता रहा है, लेकिन दमिश्क़ पर दबाव बनाए रखने के लिए वह इस्राईल के हवाई हमलों को नज़र अंदाज़ कर रहा है।
रूस के इस डबल गेम से इस्राईल को सीरिया में ईरानी सैन्य सलाहकारों, हिज़्बुल्लाह और सीरिया के सैन्य ठिकानों पर हमलों के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
इसका कारण जो भी, लेकिन एक बड़ी सच्चाई यह भी है कि सीरिया में मनमाने ढंग से हमलों की आज़ादी इस्राईल को बहुत दिनों तक हासिल नहीं रह सकेगी। इसलिए कि ईरान ने ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम विकसित कर लिया है, जो रूस के एस-300 से कहीं ज़्यादा एडवांस है। पिछले साल अमरीका के सबसे आधुनिक ड्रोन विमान ग्लोबल हॉक को आसमान में क़रीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर निशाना बनाकर, ईरान ने अपने एयर डिफ़ेंस सिस्टम की सटीकता और क्षमता की एक झलक भी दुनिया को दिखा दी थी।